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माँ का अधूरा सपना

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यह कहानी माँ के सपनों और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी है। पढ़िए यह भावनात्मक माँ पर कहानी हिंदी में। जब माँ मुस्कुराती है, तो सारी परेशानियाँ छोटी लगती हैं।  बचपन की खुशबू कितनी अजीब बात है — जब हम बड़े होते हैं तो हमें अपने बचपन की खुशबू याद आने लगती है। आदित्य भी अब वही महसूस कर रहा था। वह दिल्ली की भीड़ में फँसा एक छोटा सा आदमी था, लेकिन उसके मन में एक गाँव बसता था — जहाँ उसकी माँ रहती थी। आदित्य के लिए माँ सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं थी, बल्कि उसका पूरा संसार थी। जब वह छोटा था, माँ हर सुबह उसे जगाते हुए कहती — “बेटा, एक दिन तू बड़ा आदमी बनेगा।” उस समय आदित्य को हँसी आती थी। उसे लगता था — माँ बस मनाने के लिए कहती है। पर अब वही बात उसकी आँखों में आँसू बनकर उतर आती थी।  संघर्ष और माँ का त्याग आदित्य का बचपन गरीबी में बीता। माँ ने कभी अपनी भूख की परवाह नहीं की। वह खेतों में मजदूरी करती, फिर घर आकर रोटी बनाती, और बेटे की कॉपी-किताबें दुरुस्त करती। कभी-कभी बिजली नहीं होती, तो वह दीए की रोशनी में बेटे को पढ़ाती। माँ का सपना था कि आदित्य “अफसर” बने। पर हालात इतने कठिन थे कि स्कूल की फीस ...

Pahalgam attack reaction 2025|पहलगाम आतंकी हमला 2025

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  पहलगाम आतंकी हमला 2025 पहलगाम पर हमला ''आतंक के साए में एक शांत वादी" 22 अप्रैल 2025 को, जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत और शांत माने जाने वाले पर्यटन स्थल पहलगाम की वादियों में गोलियों की गूंज सुनाई दी। जहां कभी पर्यटक प्रकृति के संगीत में खो जाया करते थे, आज वहीं गोलियों और धमाकों की आवाज़ों ने हर किसी का दिल दहला दिया। शाम करीब 6:15 बजे सुरक्षाबलों का काफिला जब पहलगाम के पास से गुजर रहा था, तभी अचानक घात लगाकर बैठे आतंकियों ने हमला कर दिया। पहले ग्रेनेड फेंका गया, फिर अंधाधुंध गोलियां चलाई गईं। इस हमले में अब तक दो जवानों के शहीद होने की खबर है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। मुठभेड़ अब भी जारी है और तीन आतंकियों को सुरक्षा बलों ने घेर लिया है। कायराना हरकत, लेकिन भारतीय जज़्बे को चुनौती नहीं दे सकती यह हमला ना सिर्फ सुरक्षाबलों पर है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र, हमारी एकता और हमारी शांति की भावना पर हमला है। जो वादी कभी प्रेम और सुंदरता की मिसाल मानी जाती थी, वहीं अब आतंक का काला साया फिर से लौटने की कोशिश कर रहा है। लेकिन हम सबको यह याद रखना चाहिए –  भारत डरता नहीं, भारत...

तुम संग – एक नई दुनिया | भाग 2|Tum sang - ek nai duniya| bhag 2

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A story of love, struggle, and self-confidence..." कहते हैं, कुछ मुलाकातें सिर्फ इत्तेफाक नहीं होतीं… वे किस्मत के धागों से बंधी होती हैं। यह कहानी भी एक ऐसे ही प्यार की है, जो वक्त से परे है... एक प्रेम, संघर्ष और आत्म-विश्वास की कहानी... गाँव की गलियों में सन्नाटा था। हर दरवाज़ा, हर खिड़की, हर निगाह जैसे सुमन और अविनाश के बारे में जानती थी, मगर चुप थी। अब दोनों के लिए केवल सपने काफी नहीं थे—उन्हें हिम्मत और रास्तों की भी जरूरत थी। सुमन ने घर में कैद रहते हुए भी हार नहीं मानी। उसने अपनी पुरानी नोटबुक्स छुपाकर रखी थी। जैसे ही मौका मिलता, वह रात में चुपचाप छत पर जाकर पढ़ाई करती। उस शांत अंधेरे में, उसके भीतर उम्मीद की रौशनी जलती रहती। उधर अविनाश भी खेत में काम करने के बाद बचे हुए समय में जी-जान से पढ़ाई करता। उसकी आँखों के नीचे गहरे काले घेरे बन गए थे, पर उसकी आत्मा थकी नहीं थी। एक शाम, गाँव में एक नए स्कूल का उद्घाटन हुआ। सुमन को यह खबर सुनते ही उम्मीद की एक किरण दिखी। उसने अपनी माँ से आग्रह किया, “अम्मा, मुझे फिर से स्कूल जाना है। अगर पढ़ूँगी नहीं, तो क्या बन पाऊँगी?” माँ ने कुछ ...

भारत और थाईलैंड – दो राष्ट्र, एक आत्मा|India and Thailand – Two Nations, One Soul.

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  भारत और थाईलैंड – दो राष्ट्र, एक आत्मा भारत और थाईलैंड के रिश्ते केवल राजनयिक संवाद नहीं, बल्कि दिलों के तारों से जुड़ी वह परंपरा हैं जो हज़ारों वर्षों से चली आ रही हैं। इन संबंधों की नींव सभ्यता, संस्कृति और आस्था में गहराई से धँसी हुई है। और हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थाईलैंड यात्रा ने इस ऐतिहासिक बंधन को एक नई ऊर्जा दी है। जब हम भारत-थाईलैंड की साझेदारी की बात करते हैं, तो इतिहास खुद बोल उठता है। बौद्ध धर्म की पहली किरण जब भारत से निकली, तो थाईलैंड तक पहुँची और आज तक वहाँ उजास बनकर व्याप्त है। थाईलैंड में प्रचलित थेरवाद बौद्ध परंपरा की जड़ें सीधा भारत की भूमि से जुड़ी हैं – वह भूमि जहाँ सिद्धार्थ गौतम ने बुद्धत्व पाया और जहाँ उनका अंतिम निर्वाण हुआ। थाई संस्कृति में भारत की छाप सिर्फ बौद्ध धर्म तक सीमित नहीं है। रामायण, जिसे थाईलैंड में रामाकियन कहा जाता है, वहाँ की नाट्य परंपरा, चित्रकला और त्योहारों में आत्मसात हो चुकी है। मंदिरों की बनावट, भाषा में संस्कृत और पाली का प्रभाव, और परंपराओं में भारतीय गंध साफ महसूस होती है। प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यात्रा 202...

तुम संग – एक नई दुनिया Tum Sang - Ek Nai Duniya

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    तुम संग – एक नई दुनिया  "कहते हैं, कुछ मुलाकातें सिर्फ इत्तेफाक नहीं होतीं… वे किस्मत के धागों से बंधी होती हैं। यह कहानी भी एक ऐसे ही प्यार की है, जो वक्त से परे है... तुम संग, एक नई दुनिया , भाग 1. एक प्रेम, रोमांच और सपनों की कहानी... पेश है एक अनोखी यात्रा, जहाँ प्रेम की हर धड़कन में नई दुनिया बसती है..। गाँव का सूरज धीमे-धीमे पहाड़ियों के पीछे से झाँक रहा था। खेतों में हल जोतते बैलों की आवाज़ और पक्षियों की चहचहाहट सुबह के सन्नाटे को तोड़ रही थी। इसी गाँव में रहता था अविनाश—एक साधारण किसान परिवार का लड़का, मगर सपने असाधारण। अविनाश की आँखों में एक लक्ष्य था—इंजीनियर बनने का। मगर यह राह आसान नहीं थी। गाँव में शिक्षा को लेकर उदासीनता थी। लोग मानते थे कि पढ़ाई से ज्यादा जरूरी खेतों में काम करना है। फिर भी, वह हर सुबह अपनी पुरानी किताबें उठाता और पीपल के पेड़ के नीचे पढ़ाई करने बैठ जाता। उसी गाँव में रहती थी सुमन —एक तेज-तर्रार लड़की, जिसे पढ़ाई से उतना ही प्यार था जितना अविनाश को। मगर उसके घर की सोच उससे बिल्कुल विपरीत थी। "लड़कियों को ज्यादा पढ़ने की क्या जरूरत...

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