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माँ का अधूरा सपना

यह कहानी माँ के सपनों और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी है। पढ़िए यह भावनात्मक माँ पर कहानी हिंदी में। जब माँ मुस्कुराती है, तो सारी परेशानियाँ छोटी लगती हैं।  बचपन की खुशबू कितनी अजीब बात है — जब हम बड़े होते हैं तो हमें अपने बचपन की खुशबू याद आने लगती है। आदित्य भी अब वही महसूस कर रहा था। वह दिल्ली की भीड़ में फँसा एक छोटा सा आदमी था, लेकिन उसके मन में एक गाँव बसता था — जहाँ उसकी माँ रहती थी। आदित्य के लिए माँ सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं थी, बल्कि उसका पूरा संसार थी। जब वह छोटा था, माँ हर सुबह उसे जगाते हुए कहती — “बेटा, एक दिन तू बड़ा आदमी बनेगा।” उस समय आदित्य को हँसी आती थी। उसे लगता था — माँ बस मनाने के लिए कहती है। पर अब वही बात उसकी आँखों में आँसू बनकर उतर आती थी।  संघर्ष और माँ का त्याग आदित्य का बचपन गरीबी में बीता। माँ ने कभी अपनी भूख की परवाह नहीं की। वह खेतों में मजदूरी करती, फिर घर आकर रोटी बनाती, और बेटे की कॉपी-किताबें दुरुस्त करती। कभी-कभी बिजली नहीं होती, तो वह दीए की रोशनी में बेटे को पढ़ाती। माँ का सपना था कि आदित्य “अफसर” बने। पर हालात इतने कठिन थे कि स्कूल की फीस ...

जहरीला चलन कहानी (दहेज प्रथा पर आधारित) भाग - 2|

दृश्य द्वितीय।        अंक प्रथम

इस कथानक के सभी कहानी तथ्य पूर्णतया काल्पनिक है___ लेखक - केदारनाथ भारतीय 

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जहरीला चलन कहानी (दहेज प्रथा पर आधारित) भाग - 2 https://www.magicalstorybynb.in/2025/01/blog-post.html


वह सुंदर सा कमरा चारों तरफ से अनेकों फूलों के सुगंधों एवं इत्रो से भरा पड़ा है। रेखा सजी - संवरी पलंग पर न बैठकर बगल में चटाई पर बैठी हुई, अपने मन के सावनरियाँ { सुनील} के इंतजार में पलक – पांवड़े बिछाए पी – पिपासनी की भांति शांत आसीन हैं। नवासत – भूषण साजे मुखमंडल तीव्र आभा से दमक रहा है। किंतु लाल चुनरियों में लिपटी वह किसी गुड़ियों की भांति सुमन शरीके खिली हुई, कल्पनाओं के व्योम – मंडल में बिना पंख लगाए ही उड़ रही है। पूर्ण रुपेड उसका चांद जैसा मुखड़ा घुंघट में तिरोहित है और तभी चुपके से वहां सुनील का प्रवेश होना।

सुनील: [आश्चर्य में देखते ही चौंकना]

अरे.....! अरे.....! ये क्या देख रहा हूं।आश्चर्य है, इक्कीसवीं सदी की यह सुहागिन नायिका, प्रथम मिलन की बेला में, सुहाग सेज पर न बैठकर एक तुच्छ चटाई पर बैठी है।

रेखा: [ उठते हुए]

स्वामी! आपके इन चरण कमलों में, आपकी यह अर्द्धांगिनी, आपको कोटि - कोटि  प्रणाम करती हैं।


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